बिलासपुर नगर के स्थान-नामों का भाषावैज्ञानिक अध्ययन
राजकुमार टण्डन
शोध-छात्र, साहित्य एवं भाषा अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छŸाीसगढ़)
1. प्रस्तावनाः
प्राकृतिक सौंदर्य से आच्छादित व अरपा नदी के तट पर बसा बिलासपुर अपने शिक्षा, व्यवसाय तथा संपदा के लिए भारतवर्ष में प्रसिद्ध है। प्राचीनकाल में घने जंगलों से ढँका रहता था, वही छोटा-सा गाँव धीरे-धीरे विकास की सीढ़ियाँ चढ़ता आज छŸाीसगढ़ प्रदेश की न्यायधानी है। जहाँ भारत देश का भारतीय रेल्वे जोन, केंद्रीय जेल तथा छŸाीसगढ़ के महान संत गुरु घासीदास पर केंद्रीय विश्वविद्यालय है एवं छŸाीसगढ़ के गाँधी के नाम से विख्यात पं. सुंदरलाल शर्मा के नाम पर पं. सुन्दरलाल षर्मा मुक्त विश्वविद्यालय स्थापित है। इस नगर को 55 वार्डों मेें बाँटा गया है, जो 46.12 वर्ग कि.मी. तक फैला है तथा समुद्र तल से 292.30 मीटर ऊँचाई पर स्थित है, जहाँ षिक्षा से लेकर व्यवसाय तक के साधन उपलब्ध हैं।
2. नामकरणः
‘‘बिलासपुर नगर का नामकरण अपने-आप में एक करुण कथा है। प्राचीनकाल में यह क्षेत्र रतनपुर राज्य के अंतर्गत आता था और उन दिनों रतनपुर में रत्नदेव द्वितीय (1120-1135) नाम के राजा राज्य करते थे। उस समय वर्तमान बिलासपुर के स्थान पर अत्यंत घना जंगल था, जहाँ केंवट जाति की कुछ झोपड़ियो थीं। एक बार राजा रत्नदेव आखेट हेतु इस वन-प्रदेश में आए। शिकार का पीछा करते हुए उनके कुछ सैनिक आगे निकल गए तथा केंवट की बस्ती में पहुँचकर चना-मुर्रा बेचने वाली ‘बिलासा’ नाम की कन्या से उन्होंने दुव्र्यवहार किया, जिस पर आत्मग्लानि से भरी बिलासा ने आत्मदाह कर लिया। इस घटना की जानकारी होने पर राजा ने दोषी सैनिकों को कठोर दण्ड दिया तथा प्रायश्चित स्वरूप उस महान सती के नाम पर उसी स्थान पर ‘बिलासा ग्राम’ बसाया, वही बिलासा ग्राम कालक्रम के रूप में परिवर्तित करता हुआ आज बिलासपुर के नाम से एक प्रमुख प्रशासनिक एवं औद्योगिक शहर तथा जिला एवं संभागीय मुख्यालय के साथ राज्य की उपराजधानी के नाम से विख्यात है।’’1
बिलासपुर के स्थान-नामों के आधार पर जगत के सभी जीव-जंतु, पशु-पक्षी तथा स्थानों को स्पष्ट एवं सही-सही पहचान करने के लिए के लिए नाम आवश्यक है, जिससे वस्तुओं व जीवों की वास्तविक छवि हमारे सामने आ सके, क्योंकि रामचरित मानस में लिखा है कि ‘‘बिना नाम के रूप की कल्पना करना असंभव है’’2 आगे चलकर नाम के द्वारा ही असंख्य प्राणियों, पदार्थों और मनोभावों आदि की जानकारी होती है। अतः ‘‘नाम से परिचय, अंतर एवं स्पष्टता का बोध होता है।’’3 अतः बिलासपुर नगर के स्थान नामों को समझने के लिए निम्नलिखित आधार हो सकते हैं-
2.1. धर्म के आधार पर स्थान-नामः
‘‘धर्म तथा दर्शन प्रत्येक जाति और देश की संस्कृति के अभिन्न और महत्वपूर्ण अंग रहे हैं।’’4 बिलासपुर नगर के स्थान-नामों में संस्कृति के इस महत्वपूर्ण पक्ष का पर्याप्त प्रभाव पड़ा है। धर्म के बिना जीवन की कल्पना कर पाना संभव नहीं है। अतः बिलासपुर नगर के स्थान-नामोें में धर्म के आधार पर नाम हैं, जैसे-
1.1. त्रिदेव पर- ब्रह्मा, विष्णु, महेश को हिंदू मान्यतानुसार त्रिदेव माना गया है। इनके ऊपर नाम ब्रह्मा पर तो स्थान-नाम नहीं पाया जाता है। सर्वाधिक महेश जिन्हें भोला, शंकर, महादेव, शिव इतयादि नामों से जाना जाता है- भोलानाथ मंदिर (मिनिमाता वार्ड क्र1 12), शिवघाट (पं. देवकीनंदन दीक्षित वार्ड क्र 47), शिवमंदिर (बिलासा नगर वार्ड क्र 49), शंकर नगर (विवेकानंद नगर वार्ड क्र 36)।
त्रिदेवी पर नाम- ब्रह्मा की सहचर माता सरव्ती, विष्णु की माता लक्ष्मी तथा महेश की माता जगत जननी पार्वती के नाम पर स्थान-नाम पाए जाते हैं। माँ सरस्वती पर कम, माता पार्वती पर अधिक स्थान नाम हैं- गौरीशंकर मंदिर (लाजपत राय वार्ड क्र 23), भवानी दुर्गा (तेलापारा शिवाजी नगर वार्ड क्र. 24), लक्ष्मीनारायण मंदिर (श्री जगन्नाथ नगर वार्ड क्र. 52), नवदुर्गा मंदिर (शिवाजी नगर वार्ड क्र 24), काली मंदिर (श्री जगन्नाथ नगर वार्ड क्र. 52), जय माँ काली मंदिर (शिवाजी नगर वार्ड क्र. 24)।
1.2. अवतार एवं उनके अनुचर पर आधारित स्थान-नाम- प्रमुख त्रिदेव तथा त्रिदेवियों के अतिरिक्त हिंदू देवी-देवताओें के नामों के आधार पर भी स्थानों को अभिहित किया जाता है। यद्यपि इन देवी-देवताओं की संख्या बहुत अधिक है, किंतु लोक-जीवन में इनमें से किसी को भी ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव के सदृश्य लोकप्रियता नहीं प्राप्त हुई है, परंतु फिर भी उनके अवतारों ने मनुष्य समुदाय में अपना अलग व विशेष स्थान बना लिया है, जैसे- (1) राम भगवान विष्णु के अवतार मानते हैं, पर स्थान-नाम- श्री राम मंदिर (संतोष न्रर वार्ड क्र 39), रामलीला मैदान (श्री जगन्नाथ वार्ड क्र. 52), राम चैक (बापू नगर वार्ड क्र. 53)। (2) हनुमान भगवान राम के अनुचर तथा शिव के अवतार माने जाते हैं, पर स्थान नाम हैं- बजरंग पान सेंटर चैक (निराला नगर वार्ड क्र 17), हनुमान मंदिर (आजाद नगर वार्ड क्र. 23 व रामनगर वार्ड क्र. 20), बजरंगबली मंदिर (लाजपत राय वार्ड क्र. 23), संकट मोचर मंदिर (रामनगर वार्ड क्र. 20)।
अन्य देव जैसे गणेश जो कि भगवान शंकर एवं पार्वती के पुत्र हैं, जिन्हें बुद्धि के मूल तथा सभी कार्यों में प्रथम माना जाता है, पर आधारित स्थान-नाम- गणेश मंदिर (किला वार्ड जूना नागोराव शेष वार्ड क्र 26), गणेश नगर (शहीद हेमू नगर वार्ड क्र. 38), गणेश आटा चक्की (किला वार्ड जूना नागोराव शेष वार्ड क्र. 26)।
2.2. सामाजिक स्थिति पर अधारित स्थान-नामः
बिलासपुर नगर के स्थान-नामों के नामकरण में सामाजिक आधार भी महत्वपूर्ण हैं। समाज में मनुष्य परिवार से संबद्ध होकर रहता है। पारिवारिक संबंधों का जीवन में विशेष महत्व है। ‘‘संबंध भावना का विकास ही मानव के पारस्परिक अनुराग, प्रेम तथा नैकट्य की दृष्टिपथ मेें रखकर किया जाता है। इस प्रकार स्नेह-सूत्र में आबद्ध होकर व्यक्ति जीवन में एकाकीपन, उद्विग्नता आदि को भूल जाता है।’’5
2.1. वर्ण एवं जाति- समाज के उचित संचालन हेतु अनेक वर्ण तथा जातियों में बाँटा गया है। बिलासपुर नगर में वर्ण व जातियों के आधार पर स्थान-नाम हैं, जैसे- ब्राह्मण - ब्राह्मणपारा (विद्यानगर प्रियदर्शिनी नगर वार्ड क्र. 16), कुम्हार- कुम्हारपारा (शिवाजी नगर वार्ड क्र 24), तेली- तेलीपारा (लाजपत नगर वार्ड क्र 23), सतनामी- सतनामीपारा (तालापारा क्रांतिकुमार भारतीय नगर वार्ड क्र. 12), स्वीपर- स्वीपरपारा (बापू उपनगर वार्ड क्र. 53), पटेल- पटेलपारा (रामदास नगर वार्ड क्र. 33), कतिया- कतियापारा (कस्तुरबा नगर वार्ड क्र. 4), गोंड़- गोंड़पारा (मुनुलाल गुप्त नगर वार्ड क्र. 22), ईसाई- ईसाईपारा (जरहाभाठार मिनी बस्ती नगर वार्ड क्र 7)।
2.2. व्यवसाय पर आधारित स्थान-नाम- मनुष्य की सुख-सुविधा और साज-सज्जा से संबंधित सारी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए नाना प्रकार के व्यवसायों, शिल्पों तथा पेशों का विकास होना स्वाभविक ही है। ‘‘जिनके पूर्वजों ने प्रारंभ में जो एक व्यवसाय चुन लिया वही उनके पुत्र-पौत्रादि वंशधर भी करते जाते हैं। प्रायः अब तो उसने जाति का रूप ही धारण कर लिया है।’’6 अतः व्यवसाय से संबंधित स्थान-नाम बिलासपुर नगर में हैं, जैसे- मछली बाज़ार (नागोराव शेष नगर वार्ड क्र 26), सब्जी मार्केट (नागोराव शेष नगर वार्ड क्र 26), डोंगा घाट (बसंत भाई पटेल नगर वार्ड क्र 28), सब्जी बाज़ार (रानी दुर्गावती नगर वार्ड क्र 43)।
2.3. प्रसिद्ध स्थलों एवं भूखण्ड विशेष पर आधारित स्थान-नामः
नगर में प्रसिद्ध स्थलों पर आधारित नाम हैं, जैसे- करबला चैक (शिवाजी नगर वार्ड क्र 24), जयस्तंभ चैक (क्रांतिकुमार भारतीय नगर वार्ड क्र. 12), रामनगर (रामनगर वार्ड क्र 20), एकता चैक (शिवाजी नगर वार्ड क्र 24), आदर्श काॅलोनी (इंदिरा नगर वार्ड क्र. 31)
2.4. इतिहास पर आधारित स्थान-नामः
‘‘स्वाभाविक और पुरानी प्रथा को ही ऐतिहासिक आधार का मूल माना जाता है। इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण नाम जनता की स्मृति में रहते हैं।’’7 ‘‘वीरों और महापुरुषों के प्रति श्रद्धा और निष्ठा व्यक्त करने के लिए उनके नाम स्थानों के साथ जोड़ लिए जाते हैं।’’8 बिलासपुर नगर में ऐतिहासिक स्थान-नाम हैं, जैसे- गुरु नानक चैक (विवेकानंद वार्ड क्र 36), स्वामी विवेकानंद उद्यान (रामनगरवार्ड क्र 20), संत रविदास नगर (संत रविदास नगर वार्ड क्र 25), रामकृष्ण परमहंस नगर (रामकृष्ण परमहंस वार्ड क्र. 48), गुरु घासीदास स्तंभ (श्री जगन्नाथ नगर वार्ड क्र 52)।
देश के अमर शहीदों-नेताओं की स्मृति में यहाँ अनेक स्थानों एवं वार्डों का नामकरण किया गया है, जैसे- डाॅ. अम्बेडकर वार्ड-11, नेहरू वार्ड-3, कस्तुरबा वार्ड-4, भक्त कंवरराम वार्ड-5, तिलक नगर वार्ड-6, राजेन्द्र नगर वार्ड-8, कांति कुमार भारतीय वार्ड-12, रानी लक्ष्मी बाई वार्ड-2, विनोबा भावे नगर वार्ड-14, शहीद असफ़ाक उल्ला खाँ नगर वार्ड-19, आजाद नगर वार्ड-18, लाजपतराय वार्ड-23, शिवाजी नगर वार्ड-24 इत्यादि।
2.5. शासन व्यवस्था पर आधारित स्थान-नामः
महान व्यक्तियों एवं राजाओं की महानता के कारण उनके नाम के आधार पर स्थानों का नामकरण करने की प्रथा प्राचीनकाल से वर्तमानकाल तक चली आ रही है। ‘‘प्राचीन समय में शासन व्यवस्था सम्राट अथवा राजा के अतिरिक्त उनके परिवार के सदस्यों की व्यक्तिगत संपŸिा थी।’’9 शासन व्यवस्था से संबंधित स्थान-नाम नगर में पाए जाते हैं, जैसे- सिविल लाईन (डाॅ. अम्बेडकर वार्ड-11), पी.डब्ल्यू.डी. आॅफिस (तिलक नगर वार्ड-6), अभियंता भवन (मदर टेरेसा नगर वार्ड-10), आयकर कार्यालय (गायत्री नगर वार्ड-9), एफ.सी.आई गोदाम (गायत्री नगर वार्ड-9), रेल्वे काॅलोनी (बापू उपनगर वार्ड-53), नार्मल स्कूल (इंदिरा नगर वार्ड-37), विद्युत मंडल कार्यालय (शहीद हेमू नगर वार्ड-38) इत्यादि।
2.6. भौगोलिक स्थिति पर आधारित स्थान-नामः
भौगोलिक स्थिति एवं दशा, वातावरण का मनुष्य के जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। स्थान अभिधानों का आधार वैदिककाल से यही है। बिलासपुर नगर में भी ऐसे स्थान-नाम मिलते हैं, जैसे- जबड़ापारा (शहीद मंगल पाण्डे वार्ड-44) यह सरकंडा और चांटीडीह के बीच में दबे होने के कारण इसे जबड़ापारा कहते हैं। टिकरापारा (तात्या टोपे नगर वार्ड-32) यह ऊँचाई में स्थित है इसलिए इसे टिकरापारा कहते हैं। डिपरापारा (गाँधीनगर वार्ड-30) छŸाीसगढ़ी में डिपरा अर्थात् ऊँचे स्थान से है, जो सामान्य से कुछ ऊँचा होता है। बंधवापारा (शहीद हेमु नगर वार्ड-38) यह बाँध होने के कारण बंधवापारा नाम पड़ा है।
2.7. पेड़ों के आधार पर स्थान-नामः
‘‘तदस्मिन स्तीति देशे तंन्नाम्न’’ अर्थात् जिस स्थान पर जिस वस्तु की अधिकता होती है, उस स्थान को उसी ने से मानते हैं।’’10 पेड़ मानव-जीवन के धार्मिक मान्यताओं से जुड़े होते हैं, जैसे बरगद, पीपल जिनकी पूजा की जाती है। इसी प्रकार अन्य पेड़ोें को जलाऊ लकड़ी के रूप में और साज-सज्जा के लिए इस्तेमाल किया जाता है, नगर में स्थान नाम हैं, जैसे- इमलीपारा (निराला नगर वार्ड-17), पीपल चैक (रानी लक्ष्मीबाई नगर वार्ड-29), नारियल कोठी (शहीद रामप्रसाद बिस्मिल नगर वार्ड-29), बरगद पेड़ (बंवर महादेव) (रानी दुर्गावती नगर वार्ड-43) आदि।
2.8. पशु-पक्षियों के आधार पर स्थान-नामः
‘‘पशु-पक्षी मनुष्य के सुख-दुख के साथी रहे हैं। जंगलों में निवास करते या भटकते समय ये पशु-पक्षी उसके लिए सर्वथा उपादेय थे।’’11 यही कारण है कि बिलासपुर नगर में भी पशु-पक्षियों के आधार पर स्थान-नाम पाए जाते हैं- चुचुहिया पारा (संतोष नगर वार्ड-39), तितली चैक (भारतमाता नगर वार्ड-51), मगरपारा (क्रांति कुमार भारतीय वार्ड-12) इत्यादि।
2.9. अंक पर आधारित स्थान-नामः
संख्या से अज्ञात ज्ञात होता है अतः बिलासपुर नगर में अंकों पर आधारित स्थान-नाम पाये जाते हैं, जैसे- सतबहिनिया चैक (नागोराव शेष वार्ड-26), सŸााईस खोली (विकास नगर वार्ड-1), बारह खोली (बापू उपनगर वार्ड-53)।
2.10. कला-कौशल व शिक्षा पर आधारित स्थान-नामः
मनुष्य के मस्तिष्क का स्वस्थ एवं स्वच्छ होना आवश्यक है, क्योंकि स्वच्छ शरीर में स्वच्छ मस्तिष्क का विकास होता है। इसीलिए नगर में अनेकों कला-कौशल तथा शिक्षा के आधार पर स्थान नाम हैं, जैसे- रघुराज स्टेडियम (डाॅ. अम्बेडकर वार्ड-11), पुलिस ग्राउण्ड (डाॅ. अम्बेडकर वार्ड-11), रोटरी क्लब (विनोबा नगर वार्ड-14), टाउन हाॅल (नेहरू नगर वार्ड-3), लायंस क्लब (विनोबा नगर वार्ड-14), डाॅ. ई. राघवेन्द्र राव भवन (रामनगर वार्ड-20), सुधाराव साव वाचनालय (नागोराव शेष वार्ड-26), रेल्वे स्टेडियम (लोको काॅलोनी वार्ड-54)।
2.11. खाद्य-पदार्थों के आधार पर नामकरणः
जीना है तो खाना है, बिना खाए व्यक्ति जीवित नहीं रह सकता इसलिए आज जगह-जगह घर से दूर भी घर के समान खाना मिलता है। अनेकों स्वादिष्ट पकवान पाए जाते हैं, इसी पर आधारित स्थान नाम बिलासपुर नगर में पाए जाते हैं, जैसे- महेश स्वीट्स (बिलासा नगर वार्ड-49), दिल्ली बिरयानी सेंटर (शिवाजी नगर वार्ड-24), मुस्लिम बिरयानी सेंटर (रानी दुर्गावती वार्ड-43), राजू हाॅअल (शहीद असफ़ाक उल्ला खाँ वार्ड-19), मुल्कराज हिंदू हाॅटल (रेल्वे काॅलोनी वार्ड-54), संतोष भोजनालय (शहीद असफ़ाक उल्ला खाँ वार्ड-19), मिश्रा भोजनालय (शिवाजी नगर वार्ड-24), अन्नपूर्णा दाल-भात केंद्र (रामनगर वार्ड-20)।
3. निष्कर्षः
निष्कर्ष रूप से कहा जा सकता है कि बिलासपुर नगर के स्थान-नामों का नामकरण से भाषावैज्ञानिक अध्ययन को नई दिशा मिलेगी। नामकरण के अध्ययन से इतिहास एवं संस्कृति को सुरक्षा प्राप्त होती है, जिससे भविश्य की संभावना एवं कल्पना को बल मिलता है। उक्त अध्ययन से स्थान-नामों को जनमानस तक पहुँचाया जाता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए पथ-प्रदर्षक का कार्य करता है। बिलासपुर नगर में आज सभी धर्म, जाति, भाषा तथा क्षेत्र के लोग निवास करते हैं, क्योंकि यहाँ पर भारत का रेल्वे जोन, भारत का द्वितीय सबसे बड़ा रेल्वे जोन है, जिसका 17 प्रतिशत संपूर्ण में से है। अतः सभी क्षेत्रों के लोग निवासरत हैं। अक्सर रेल्वे में बंगाल व दक्षिण भारत के लोग अधिक रहते हैं, जिससे उनकी संस्कृति का संगम बिलासपुर नगर को प्राप्त होता है। विद्या अध्ययन हेतु देश-विदेश के छात्राओं का प्रिय स्थान है, व्यापार के लिए उपयुक्त माहौल है। छŸाीसगढ़ के मध्य में बसा बिलासपुर नगर सबसे शांतिप्रिय नगर माना जाता है।
4. संदर्भ-ग्रंथः
1. शर्मा, टी.डी. छŸाीसगढ़ के पर्यटन स्थल. बिलासपुर: अरपा पाॅकेट बुक, 1999.
2. रामचरित मानस. 1: 19-22.
3. अग्रवाल, सरयू प्रसाद. अवध के स्थान-नामों का भाषावैज्ञानिक अध्ययन. लखनऊ: विश्वविद्यालय प्रकाशन, 1973, पृ. 44.
4. वही, पृ. 50.
5. वही, पृ. 70.
6. वही, पृ. 76.
7. कामिनी. बुंदेली भाषा-क्षेत्र के स्थान-अभिधानों का भाषावैज्ञानिक अध्ययन. कानपुर: आराधना ब्रदर्स, 1985, पृ. 53.
8. वही, पृ. 53.
9. अग्रवाल, सरयू प्रसाद. अवध के स्थान-नामों का भाषावैज्ञानिक अध्ययन. लखनऊ: विश्वविद्यालय प्रकाशन, 1973, पृ. 63.
10. कामिनी. बुंदेली भाषा-क्षेत्र के स्थान-अभिधानों का भाषावैज्ञानिक अध्ययन. कानपुर: आराधना ब्रदर्स, 1985, पृ. 53.
11. पाठक, विनय कुमार. छŸाीसगढ़ के स्थान-नामों का भाषावैज्ञानिक अध्ययन. दिल्ली: भावना प्रकाशन, 2000, पृ. 59.
Received on 16.12.2014
Revised on 22.12.2014
Accepted on 30.12.2014
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Research J. Humanities and Social Sciences. 5(4): October-December, 2014, 450-453